७० वर्षीय व्यक्ति के कान के परदे पर बिना छेद किए सर्जरी की

मीरारोड के वॉक्हार्ट अस्पताल में हुआ इलाज

कान में संक्रमण के कारण नाक की रूकावट से पीडित ७० वर्षीय व्यक्ति के कान के परदे पर बिना छेद किए सर्जरी की गई हैं। मरीज पर कार्टिलेज के साथ एंडोस्कोपिक कार्टिलेज टाइम्पेनोप्लासम्टी नामक एक न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी की गई। मीरारोड के वॉक्हार्ट अस्पताल के सलाहकार ईएनटी सर्जन डॉ. चंद्रवीर सिंह और डॉ. शीतल राडिया ने साथ मिलकर यह सर्जरी की हैं।
वसई में रहनेवाले व्यास (नाम बदला हुआ) हृदय की बिमारी के पिडित थे। २०१६ में उनपर हार्ट वाल्व रिपेयर सर्जरी कराई गई। जिसमें कान से पानी निकलना, बहरापन और नाक बंद होना, सांस फूलना, छींक आना, सिरदर्द और खर्राटे आना जैसी समस्याएं सामने आई थीं। उन्होंने २०२४ में इसके इलाज के लिए वॉक्हार्ट अस्पताल में संपर्क किया। उनके हृदय, उम्र और अन्य सहवर्ती बीमारियों को ध्यान में रखते हुए, उनके लिए ऑटोलॉगस सेप्टल कार्टिलेज का उपयोग करके सेप्टोप्लास्टी के साथ एंडोस्कोपिक टाइम्पेनोप्लास्टी की गई।

कान के परदे को ठीक करने और बिना किसी निशान के, एक ही सर्जरी में उनके नाक सेप्टम को ठीक करने के लिए नाक से उपास्थि का उपयोग करके सर्जरी की। और कई एनेस्थीसिया करने से बचाया। इस प्रकार की सर्जरी सुरक्षित और प्रभावी है। यह सर्जरी में समय कम लगता हैं और मरीज जल्दी ठिक हो जाता हैं। इसके अलावा कम दर्द और कान के पीछे कोई निशान नही दिखते।

मीरारोड के वॉक्हार्ट अस्पताल के सलाहकार ओटोरहिनोलारिंजोलॉजिस्ट और हेड एंड नेक ओन्को सर्जन डॉ. चंद्रवीर सिंह ने कहॉं की, “नाक सेप्टम विचलित हो गया था और कान के पर्दे में छिद्र (छेद) हो गया था। इसकी पुष्टि मरीज की क्लिनिकल जांच, सीटी स्कैन टेम्पोरल बोन और ऑडियोमेट्री टेस्ट से हुई।”
मीरारोड के वॉक्हार्ट अस्पताल के सलाहकार ओटोरहिनोलारिंजोलॉजिस्ट और हेड एंड नेक ओन्को सर्जन डॉ. शीतल राडिया ने कहॉं की, ‘‘यूस्टेशियन ट्यूब डिसफंक्शन तब होता है जब आपके मध्य कान को आपके ऊपरी गले से जोड़ने वाली नलिकाएं अवरुद्ध हो जाती हैं, जिससे टिनिटस और डीएनएस के कारण नाक से खून आना, साइनसाइटिस, सिरदर्द होता है। नींद के दौरान सांस लेने में शोर, नाक बंद होना, एक या दोनों नासिका छिद्रों में रुकावट और खर्राटे लेना।’’

सर्जरी के बाद मरीज ठीक से सांस ले सकता है। मरीज का सही समय पर इलाज न करने से बहरापन, साइनसाइटिस टिनिटस, सुनने की क्षमता में कमी आदि जैसी जटिलताएँ हो सकती थीं।
२०२३ में इंडियन जर्नल ऑफ ओटोलॉजी में प्रकाशित सर्वेक्षण के अनुसार डॉ. चंद्रवीर सिंह इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं, जिसमें दिखाया गया है कि कान के पर्दे की मरम्मत के लिए नाक के उपास्थि का उपयोग उच्च सफलता दर और न्यूनतम जटिलताओं के साथ प्रभावी है। मरीजों को कार्टिलेज ग्राफ्ट की स्वीकृति और श्रवण लाभ के लिए देखा गया। कुल १०२ रोगियों में से ९० मरीजों के कान के पर्दे बंद हो गया। इसलिए, मरीज़ सांस लेने और सुनने में सक्षम थे।

मरीज व्यास ने कहॉं की, “वॉक्हार्ट अस्पताल के डॉक्टर ने इलाज करके मुझे नई जिंदगी दी हैं। इलाज के बाद अब मुझे सांस लेने में तकलीफ नही हो रही हैं। और मेरी सुनने की क्षमता वापस आई हैं। मुझे नई जिंदगी देने के लिए में डॉक्टर का आभारी हूं।”

error: Content is protected !!